Monday, December 14, 2015

फुटनोट 58

Padmesh Mishra 167 बरस पहले मार्क्स-एंगेल्स ने लिखा था कि यूरोप के सिर पर साम्यवाद का भूत सवार है. रूसी क्रांति के बाद वह भूत विश्वव्यापी बन दुनिया के हर प्रतिक्रियावादी के सिर पर सवार हो गया. वह भूत आजकल हिंदुस्तान के हर तरह के भक्तों के सिर पर नक्सलवाद   बनकर सवार रहता है. बात कुछ भी हो नक्सलवाद-नक्सलवाद अभुआने लगते हैं. बंधु फासीवादी प्रवृत्ति पर इस कविता के बिंदुओं को खारिज करें न कि नक्सल-नक्सल चिल्लायें, लेकिन उसके लिये दिमाग लगाना पड़ेगा, भक्तों को जिसकी आदत नहीं होती. कोई ओझा न मिेले तो पॉलिटिकल इकॉनमी की मेरी 2-4 क्लास कर लीजिये. हा हा. 

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