Tuesday, November 24, 2015

फुटनोट 56

कर्म तथा विचार की बजाय जन्म के आधार पर व्यक्तित्व का आकलन ब्राह्मणवाद का मूलभूत सिद्धात है, जो भी ऐसा करता है वह प्राकांतर से ब्राह्मणवाद को मजबूत करता है. एक बहुत स्पष्ट सत्य है कि शासक जातियां ही शासक वर्ग रही हैं. अस्मिता चेतना, जिसे मैं दलित चेतना कहता हूं का रथ इतना आगे निकल चुका है कि अब किसी की औकात नहीं रोकने की हिम्मत करे, इसका कुच श्रेय तो मुल्क के क्रांतिकारी आंदोलनों का भी बनता है. इस स्पष्ट सत्य को यहां के कम्युनिस्टों तथा सामाजिक क्रांतिवादियों दोनों ने नज़र-अंदाज किया. अगला चरण दलित चेतना का वर्ग-चेतना में संक्रमण का होगा जब दुनिया के वंचित-शोषित एक हो क्रांति का बिगुल बजाएंगे तथा ऐसा समाज बनाएंगे जिसमें मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण-दमन असंभव बना दिया जायेगा.

1 comment:

  1. ​​​​​​सुन्दर रचना ..........बधाई |
    ​​​​​​​​​​​​आप सभी का स्वागत है मेरे इस #ब्लॉग #हिन्दी #कविता #मंच के नये #पोस्ट #​असहिष्णुता पर | ब्लॉग पर आये और अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें |

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