Saturday, August 1, 2015

फुटनोट 43

@Dieewker Pandey सही कह रहे हैं 1993 में मुंबई धमाकों में 257 निर्दोष मारे गये, उनके हत्यारों को सजा मिलनी चाहिये. 1992 मं मुंबई सांप्रदायिक हिंसा मं लगभग 1000 लोौग मर थे, श्रीकृष्ण कमटी की जांच रिपोर्ट में शिवसेना-भाजपा के कई नाम है, उन्हें फांसी क्यों नहीं? मीरा कोडनानी दिन भर हथियार बांती रही नरोदा पाटिया मं 95 लोग मारे गये, ज्यादातर बच्चे तथा महिलायें उस फांसी देने की बजाय महिला तथा बालकल्याण मंत्री बना दिया तत्कालीन मुमं नरंद्र मोदी ने, उसे 28 साल की सजा हो चुकी है कीसी न किसी बहाने खुल्ला घूम रही है, उसको फांसी की मांग क्यों नहीं? गर्भ फाड़ने वाला बाबू बजरंगी को क्यों नहीं? अभूतपूर्व नरसंहार-बलात्कार के आयोजन से मुल्क की सामासिक संस्कृति की हत्या करने वाले नमो की फांसी की मांग क्यों नहीं? हम मानवता के विरुद्ध इन जघन्य अपराधियों की भी फांसी के खिलाफ हैं. मृत्युदंड बर्बर तथा अमानवीय है.

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