Thursday, July 23, 2015

फुटनोट 39

Dilip C Mandal मित्र, स्वघोषित मार्क्सवादी के चलते,( जातिवादविरोधी होना जिसकी तार्किक उपपरिणाम है) मैं तो जातिवाद का शिकार हुआ हूं, नाम में मिश्र के पुछल्ले की वजह से वर्णाश्रमी गद्दार मानते हैं तथा मेर तलाश-ए-माश के दौर में शिक्षा पर इन्हीं का वर्चस्व था तथा 14 साल साक्षात्कारों के बाद दुर्घटनावश नौकरी मिल गयी. फेसबुक पर जब तर्क नहीं मिलता जो वर्णाश्रमी तथा तथाकथित सामाजिकन्यायवादी दोनों ही नाम में मिश्र पर सवाल करते हैं. दोनों को मैं एक ही जवाब देता हूं, कि कामों तथा विचारों की बजाय जन्म क जीववैज्ञानिक संयोग की अस्मिता के आधार पर किसी का मूल्यांकन ब्राह्मणवाद का आधारभूत सिद्धांत है.

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