Friday, July 24, 2015

लल्ला पुराण 168 (फुटनोट 40)

Sumant Bhattacharya दिल साफ न हो तो ईमानदारी कहां से आयेगी. दोनों संघपुरुषों की तस्वीर इनके बयानों के लेख के साथ पोस्ट किया था लेकिन लोग पढ़ले का परहेज त्यागने का कष्ट नहीं उठाते. मैं उनके बयान के बारे में साफ राय नहीं बना पा रहा था कि ऐसे बेसिर-पैर बयान मूर्खतापूर्ण हैं धूर्ततापूर्ण, इसलिए मित्रों राय के लिए वह लिंक शेयर किया. ईमानदारी शायद चारण कर्म की सीमा पार कर जाती है. लेख के बिदुओं पर राय-विचार की जगह तुम पत्नी से पिटाई का मेरा राज़ खोलने लगे कि वे मुझे घर में पीटती हैं कि सड़क पर, वैसे जनतांत्रिक-पारदर्शी-समानुभूति पूर्ण रिश्तं में मार-पीट की नौबत नहीं आती. बाकी तुम मोदियाओ या जो भी करो मेरा क्या जाता है. मजबूत जज्बे तथा तर्कशील मष्तिक से संपन्न, मौलिक चिंतन में सक्षम किसी युवा मित्र को गौड़-अप्रासांगिक मुद्दों में ऊर्जा नष्ट करते देख कष्ट होता है.यह वस्प्रतुतःत्यक्ष-परोक्ष जाने-अनजाने गौड़ मुद्दे उछालकर समाज के प्रमुख अंतरविरोधों की धार कुंद करने की शासक वर्गों की साश्त साजिश में योगदान की भूमिका अदा करता है. सादर.

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