Tuesday, June 2, 2015

फुटनोट 34


हम लोग इलाहाबाद विवि मे जीयन झा से अक्सर बैंक रोड होते प्रयाग चाय पीने जाते थे रास्ते भर गप्पें करते, गाते. बीच सड़क पर गोल जमा कर. सड़कों पर मुख्य वाहन रिक्शा था. शहर में कारें बहुत कम थीं. एक बार हम लोग बीच सड़क में गोष्ठी कर रहे थे, कविवर रवींद्र उपाध्याय ,,,,,,, संचालन कर रहे थे. कविवर के बारे मे फिर कभी, सघन साहित्यिक प्रतिभा संपन्न थे, पीसीयस होने के बाद गायब से हो गये. माफी चहता हूं. बंगलो रोड पर एक बड़े वकील मिश्रा या चतुर्वेदी(याद नहीं) की कोठी थी. वह तेजी से कार चलाता आया, लगा ऊपर चढ़ा देगा. हम सब फुर्ती से पत्थर-कंकड़ उठा युद्ध मुद्रा में आ गये. वकील साहब ने कार रोका और हम सब से परिचय करने लगे तथा कार कड़ी कर हमारे साथ प्रयाग स्टेसन गये. सबने जम कर बन-मक्खन खाया, चाय पिया, भुगतान वकील साहब ने किया.

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