Sunday, May 24, 2015

फुटनोट 30

नहीं मित्र, मैं जेयनयू का छात्र तथा निष्कासित छात्र रहा हूं, शिक्षक दिवि में हूं. लोग कहते हैं तुम्हारे साथ नाइंसाफी हुई, देर से नौकरी मिली. मैं कहता हूं कि अन्याय की शिकायत तो तब करिये जब आप मानते हों क् समाज न्यायपूर्ण हो. हम तो पोस्टर लेकर घूमते हैं कि यह अन्यायपूर्ण समाज है, जिसे बदलना है, तो अन्यायपूर्ण समाज में अन्याय की शिकायत अनुचित है. देर वाला सवाल उल्टा है, मिल कैसे गयी. इलाहाबाद विवि में 1985 या 86 में इंटरविव देने गया. 6-7 पोस्ट थीं. मेरा इंटरविव इतना लंबा चला कि मैं किराये पर घर के बारे में सोचने लगा था कि तेलियर गंज में घर लूं कि झूसी में, (बनना शुरू हुआ था). हा हा. इसीलिये न्यायपूर्ण समाज की लड़ाई की लामबंदी करना है.

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