Saturday, July 26, 2014

फुटनोट 4

एक फेसबुकी युवक ने एक लड़की की एक विप्लवी फेसबुक पोस्ट पर, मेरे एक कमेंट पर निजी आक्षेप करते हुए मुझ जैसे कब्र मे पैर लटकाये बुड्ढों में सद्बुद्धि से नाउम्मीद हो, हमारे जल्दी जाने की कामना की. वैसे तो मैं 135 साल जिऊंगा (हा हा कहने में क्या जाता है) लेकिन मौत से कभी डरा नहीं कितनी भी करीब क्यों न रही हो, न अब. भूत और भगवान के भय से जो मुक्त हो जाये उसे किसी बात का डर नहीं होता मौकत का भी नहीं. उनको मैंने उन्हें ब्लॉक कर दिया. विमर्श को विकृत करने के लिए बेहूदे निजी आक्षेप के विषयांतर करने वालों को इसलिए ब्लॉक कर देता हूं कि फौरी प्रतिक्रिया मे मैं भूल जाता हूं मैं 40 साल पहले 20 साल का था, और यह भी कि "समाज " की सठियाने के करीब पहुंचे लोगों से अलग अपेक्षायें होती हैं. किसी ऐसे व्यक्ति के निजी आक्षेप की फौरी प्रतिक्रया में जवाबी निजी आक्षेप कर चुकने पर अफशोस और आत्मग्लानि होती है जिसे मैं उसके 2-4 वाक्यों से जानता हूं. (वैसे तो हमारा हर वाक्य व्यक्तित्व का कुछ आभास तो देता ही है) लेकिन तब तक लिख-कह चुका होता हूं. अक्सर ऐसे लोगों को बिना जवाब दिए ब्लॉक कर देता हूं, लेकिन कभी कभी अपच हो जाती है. निम्न कमेंट ऐसी ही अपच का नतीजा है.

@ Somnath Chakraaborti: सोच की प्रगतिशीलता उम्र से नहीं आती, आप जैसे तमाम जवान-बुड्ढे जवानी के नाम पर कलंक बन कोचिंग के नोट रटने जैसी तोतागीरी करते हुए धरती पर बोझ बने घूम रहे हैं. लगता है कोचिंग के नोट रटते रटते दिमाग में जवानी में ही जंग लग गयी  जिससे वह समझ की क्षमता खो चुका लगता है, भाषा की बद्तमीजी उसी का उपपरिणाम है. सही कह रहे हैं मृत्यु ही एक अंतिम सत्य है मुझे ही नहीं, आपको भी मरना है और कौन कब मरेगा कोई नहीं जानता. हो सकता है मुझे ही आपकी अंत्येष्टि में शामिल होना पड़े और अफशोस करना पड़े कि जवान लड़का दुनिया से बिना कुछ सीखे चला गया. मेरी तो कामना है आप लंबी ज़िंदगी जिएं, जवानी में बुड्ढी हो चुकी सोच को थोड़ा दाना-पानी दें और सोच को भी जवान बनाएं. लेकिन चापलूसी और जहालत के अहंकार की आपकी प्रवृत्ति इसमें बाधक हैं, दिमाग का इलाज करा लें. फिर से सद्बुद्धि की कामना करता हूं.

No comments:

Post a Comment